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कहानी मेरी अधूरी

उनको देखा पर हुई
मुलाक़ात तो नहीं  उनसे मिलने के दिल में हैं   ज़ज्बात तो वहीं 
दिल में उठती है कसक  सुन सके तो सुन ले कोई  टूटे दिल की होती है  आवाज़ क्यों नहीं 
मुफ़लिसी के सिलसिले ये  चल जो पड़े हैं  पीछे हम भी नहीं हटते  हम भी ढीठ बड़े हैं

मुलाक़ात ये हमारी
एक बार है ज़रूरी
चाहते हैं दो दिल मिलना
कुछ है मग़र मज़बूरी

ठुकरा दे चाहे मुझको
ये सारा ज़माना
तू ना मुझे भुलाना
रखना\भले तू दूरी

मिलेगा रब जो मुझको पूछूंगा मैं ये उससे
क्यों हो सकी ना पूरी
कहानी मेरी अधूरी
कहानी तेरी अधूरी

एक तू वहाँ तन्हा

एक तू वहाँ तन्हा
एक मैं यहाँ तन्हा
हमारी मोहबत्तों का
एक अकेला ख़ुदा गवाह

लेलेता रब सब खुशियाँ
देदेता ग़म वो बेइंतिहा
जो होती साथ मेरे तू
ना मुझको होती कुछ परवाह
हमारी मोहबत्तों का
एक अकेला ख़ुदा गवाह

तेरी बेवफाई को
रखेंगे हम सहेज के
तेरी चाहतों का एक
महल हम बनाएंगे
जो वादे तोड़ दिये तूने
वो महल उनसे सजायेंगे
जुदा होकर तू ख़ुश है
चलो इसमें भी क्या गिला
फिर ना पूछे कोई हमसे
कि करके इश्क़ क्या मिला
हमारी मोहबत्तों का
एक अकेला ख़ुदा गवाह

happy marriage anniversary

Ho sake to bhula de mujhe
Ya itna bhi dard na de mujhe
Tuje wasta pahli raat ka
Wo raat fir lota de muje