कहानी मेरी अधूरी

उनको देखा पर हुई
मुलाक़ात तो नहीं 
उनसे मिलने के दिल में हैं  
ज़ज्बात तो वहीं 

दिल में उठती है कसक 
सुन सके तो सुन ले कोई 
टूटे दिल की होती है 
आवाज़ क्यों नहीं 

मुफ़लिसी के सिलसिले ये 
चल जो पड़े हैं 
पीछे हम भी नहीं हटते 
हम भी ढीठ बड़े हैं

मुलाक़ात ये हमारी
एक बार है ज़रूरी
चाहते हैं दो दिल मिलना
कुछ है मग़र मज़बूरी

ठुकरा दे चाहे मुझको
ये सारा ज़माना
तू ना मुझे भुलाना
रखना\भले तू दूरी

मिलेगा रब जो मुझको
पूछूंगा मैं ये उससे
क्यों हो सकी ना पूरी
कहानी मेरी अधूरी
कहानी तेरी अधूरी

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